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Friday, 28 April 2017

राष्ट्रपति कौन ?  : बनस्थली डायरी 

बात थी 1975 की , मैंने बनस्थली गांव में एक हमउम्र युवक से सवाल पूछा था :

  " भारत का राष्ट्रपति कौन है ?"

   इसी का उल्लेख करते हुए पिछले बरस पोस्ट लिखी थी .

 कुछ मुद्दे हैं जो आज भी विचारणीय हैं .

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राष्ट्रपति कौन ? 


 कल मैंने अपनी पोस्ट में शिव धनुष का प्रश्न उठाया था आज उससे मिलता जुलता राष्ट्रपति विषयक प्रसंग उठा रहा हूं , शायद बात कुछ स्पष्ट होवे .

वर्ष उन्नीस सौ पिचहत्तर , आपात काल लागू हुए कुछ एक महीने बीत चुके थे उस दौर में बनस्थली के गांव में राजनीतिक जागरूकता जानने को अपनी सी उमर के एक युवक से मैंने प्रश्न किया था . ये युवक पढ़ने की उमर में स्कूल शिक्षा गांव में ही रहकर पूरी कर चुका था और खेती करता था , इतना मुझे याद है .


मैंने पूछा: " भारत के राष्ट्रपति कौन हैं....?"


 युवक ने पूरे आत्मविश्वास से उत्तर दिया :


" डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद ."


 वह अपनी जगह सही था , जब वो पढने गया उसने अपनी पढ़ाई की किताब में जो कुछ पढ़ा था उसी के आधार पर वह उत्तर दे रहा था . समय आगे बढ़ गया , महामहिम अब कोई और हैं उसे पता नहीं था . यह वह दौर था जब टेलीविजन की ऐसी छाया इस देश पर नहीं पड़ी थी . केवल चार महा नगरों में ही सीमित प्रसारण होता था . उन्हीं दिनों इसरो ' इम्पैक्ट ऑफ टेलीविजन ' को लेकर सर्वे करवा रहा था कि पहले क्या हाल है और आगे क्या हाल होगा .

चलो लौटें गांव में , मेरा दूसरा सवाल था :


" अपने गांव के सरपंच कौन हैं....?"

युवक का उत्तर सही था:

" दूल्हा राम जी."

पता लग रहा था कि युवक स्थनीय बातों को जानता था बाकी देश काल और अन्य बातों में किताबी ज्ञान पुराना हो गया यह अहसास उसे नहीं था .


शताब्दी बदल गई , संचार माध्यम कितनी तरह के आ गए पर कुछ एक टी वी कार्यक्रमों में संचार का वैसा ही हाल इस दौर में भी देखा गया . मित्र काशी नाथ शुक्ल ने उस ओर ध्यान दिलाया . क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसे ही पिछड़ी रहेगी ? यही सोचने वाली बात है .


प्रातःकालीन सभास्थगित .

इति .

विचारार्थ : Manju Pandya


सुमन्त पंड़्या 

(Sumant Pandya )

आशियाना आँगन , भिवाड़ी .

29 अप्रेल 2015 .

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😊😊 अपडेट - आज दिन जयपुर से दिनांक 29 अप्रेल 2016 .


गए बरस भिवाड़ी में थे तब प्रातःकालीन सभा में ये बात छेड़ी थी मैंने और बड़ी सार्थक चर्चा प्रारम्भ हुई थी मेरे एक छोटे से उल्लेख से .

इस पोस्ट को सहेजकर ब्लॉग पर प्रकाशित करूंगा . आगे करते हैं बात .

सुप्रभात .

सुमन्त पंड्या .


@ गुलमोहर , शिवाड़ एरिया , बापू नगर , जयपुर .

  शुक्रवार 29 - 4 - 2016 .

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अपडेट :

दो बरस पहले जो बात भिवाड़ी में छेड़ी थी उस पर चर्चा तो चली ही , आज भी ये चर्चा प्रासंगिक है । 

आज डूंगरपुर की प्रातःक़ालीन सभा में इसे ब्लॉग पर भी प्रकाशित किए देता हूं ।

जय भोलेनाथ । 🔔🔔

शनिवार २९ अप्रेल २०१७ ।

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Thursday, 27 April 2017

शिव धनुष किसने तोड़ा  ? : स्मृतियों के चलचित्र  ।


फ़ेसबुक संग्रहागार ने आज याद दिलाया ये क़िस्सा तो लगा इसे ब्लॉग पर होना चाहिए ।

शिव धनुष किसने तोडा ?


स्कूल में इन्स्पेक्टर साब निरीक्षण के लिए आए थे . एक कक्षा में किसी विद्यार्थी से उन्होंने पूछा :


" बताओ शिव धनुष किसने तोड़ा ... ?"

(प्रश्न पुस्तक के पाठ से ही सम्बंधित था , यह स्पष्टीकरण यहां आवश्यक है )


विद्यार्थी थोड़ा सा सहम कर बोला :


"साब , मैंने तो नहीं तोड़ा ..."


उत्तर से संतुष्ट न होकर साब कक्षा के अध्यापक की ओर मुड़े और इस बाबत जानना चाहा तो अध्यापक कुछ इस प्रकार बोले ;


" ये लड़का शैतान है , चाहे मने कर रहा हो , जरूर इसने ही तोड़ा होगा ."


 इन्स्पेक्टर साब उत्तर से थोड़ा अचम्भे में पड़े और इस बाबत प्रधानाध्यापक जी से स्पष्टीकरण चाहा तो वे कुछ इस प्रकार बोले :


" साब असावधानी में टूट फ़ूट हो जाती है , अब जो हो गया सो हो गया .

आज आप भी यहां आए हुए हैं , आदेश दे दीजिए ' राइट ऑफ ' कर देते हैं . "


 अब कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं थी . कूए में ही भांग पड़ी हुई थी . ( शिव भक्तों से विशेष क्षमा याचना .)

 

ये किस्सा मैंने एक सेमीनार के दौरान वर्ष 1974 में सिंधिया पब्लिक स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल खानोलकार साब से सुना था जो आज अपनी याद से दोहराया है .

यहां दोहराने का मकसद किसी भी समूह का दिल दुखाने का नहीं है .

लेकिन आप मानेंगे कि चाहे ये बात कुछ अतिशयोक्तिपूर्ण लगे इससे मिलते जुलते उदाहरण आज भी मिल जाते हैं .


विलम्ब से हुई प्रातःकालीन सभा स्थगित .

इति .

समर्थन : Manju Pandya


सुमन्त पंड़्या 

(Sumant Pandya )

आशियाना आंगन , भिवाड़ी .

28 अप्रेल 2015 .

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आज ब्लॉग पर प्रकाशित 

डूंगरपुर   २८ अप्रेल २०१७ ।

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