Sunday, 9 April 2017

आप बड़े कृपालु  : आपका अभिनंदन 🌺

आप से हम हैं  । क्यों ? अभी वो ही बताने जा रहा हूं ।






अभी थोड़े ही दिन हुए  ब्लॉग को देखने वालों की कुल संख्या चौदह हजार के पार चली गई है । आप में से कुछ लोग मिलते हैं तो ऐसा कहते हैं कि हम आपके ब्लॉग के साइलेंट विज़िटर्स  हैं । कोई बात नहीं आप छानै  छानै ही सही देखा करो ये ब्लॉग  । मैं आपके लिए ही लिखता हूं कि आपको अपनी सी लगे मेरी बातें ।

आप हैं तो हम हैं क्योंकि हम कोई अलग अलग थोड़े ही हैं । हमारा ब्लॉगर - पाठक का रिश्ता बना रहे । कभी कभार बताते भी रहा कीजिए कि आपको मेरा लिखा कैसा लगा ।

फिर एक बार आपका आभार और अभिनंदन ।🌺🌺

गुलमोहर कैम्प , जयपुर 

११ अप्रेल २०१७ .

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म्हे अ हैगा छां : जयपुर डायरी .

👍👍 “....... म्हे  अ हैगा छां ! म्हां नै  एक जोड़ …. दिवा ल्या .”  👌👌👌




  #sumantpandya   #जयपुरडायरी 




सत्ता परिवर्तन के बाद ठाकुर साब को  जब अपनी राजनैतिक सामर्थ्य के अनुरूप एक सम्मान जनक नियुक्ति का पत्र मिला तब की बात है  .




ठाकुर साब गांव से चलकर जयपुर आए और  पहुंचे गांव के एक पढ़े लिखे युवक के पास  और अपने हाथ का एक रुक्का दिखाकर जो कुछ बोले उसका अभिप्राय स्पष्ट ही है . वे बोले  :




☺” पिरोत जी का भाया  ! म्हे अ हैगा छां  , कोई न काम दे सकां छां  , कोई को भी एक्सक्लेशन ( explanation )   काल कर सकां छां  , तू चाल अर म्हां नै एक जोड़ धोती कुर्ता दिवा ल्या . “




पिरोत जी का भाया गए और उन्हें जोड़ दिवा लाए  और अगले दिन ठाकुर साब दल - बल सहित पहुंचे थे सहकारी क्षेत्र के एक बैंक के चेयरमैन का पद भार ग्रहण करने . बैंक का सारा अमला उनके स्वागत में खड़ा था .




बात तब खुद पिरोत जी का भाया ने ही हम लोगों को बताई थी और  संवाद के अनोखेपन के कारण बरसों पुरानी  बात आज दिन तक याद रही इस लिए मैंने इसे दर्ज करना मुनासिब समझा .




नमस्कार और गुड आफ्टर नून .

आपका क़िस्सागो :


नेहरू गार्डन से नमस्कार  🙏

जय भोले नाथ ।🔔🔔

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Friday, 7 April 2017

अटकने की आदत : स्मृतियों के चलचित्र 



अटकने की आदत : बनस्थली डायरी

अटकने की आदत :

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#sumantpandya #बनस्थलीडायरी


1.

  ये तो सुना हुआ वाकया है -

देहात के एक स्कूल में माट साब ने एक भोले से बच्चे से पूछा :

" च्यों रे तूने काजल नांय लगवायो ? "

( क्यों रे तू ने काजल नहीं लगवाया ? )


दूसरा बच्चा बताने लगा कि उसकी माँ पीहर गई हुई है .

" मास्टर जी जा की माई पीर गई है ."


तुरत मास्टर जी बोले :

"अरे तो बावरे , चाची पै ही लगवाय आतो !"

अर्थात पगले चाची से ही काजल लगवा आता .

मानो स्कूल आने के लिए काजल लगवाकर आना जरूरी हो .


मास्टर जी को अटकने की आदत जो थी .


2.

 मुझे लगता है उन्ही मास्टर जी की रूह कभी कभी मुझ पर भी काबिज होती है .

 एक बार की बात मैं जयपुर से बनस्थली के लिए सुबह की बस में यात्रा कर रहा था . सहयात्री युवक सुन्दर सूट पहने था और उसके पास सामान के नाम पर कुल एक बैग था जैसा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के पास होता है .

थोड़ा समय बीता मैं अनायास उससे पूछ बैठा :


" एम आर हो ? "


वो बोला और स्वीकृति में सर भी हिलाया :

" जी , सर ."

मैं उन्ही मास्टर जी की तरह बोला:


" तो फिर... टाई क्यों नहीं लगाईं ? एम आर तो टाई जरूर लगाते हैं ."


वो युवक बताने लगा कि वो किसी समारोह में जा रहा था और इस लिए ड्यूटी वाला एटीकेट उस समय लाजिमी नहीं था .

वो मुझसे पूछने लगा :


"आप सर बनस्थली में काम करते हैं ?"

और यों बातों का जो सिलसिला शुरु हुआ वो रास्ते भर चलता रहा .

वही अपनी अटकने की आदत .


उपसंहार :

जब जब यात्रा में जीवन संगिनी साथ होती हैं तो मुझे इस प्रकार गैर जरूरी संवादों से बचाती हैं . ये एक मिसाल तो उस यात्रा की है जो मैंने अकेले की थी .

ऐसे एक आध संसमरण और लेकिन फिर कभी .....

इति .

जीवन संगिनी : Manju Pandya


#अटकनेकीआदत


#बनस्थली


सुप्रभात good morning .


सुमन्त

आशियाना आँगन , भिवाड़ी .

8 अप्रेल 2015 .

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आज का अपडेट :

दो बरस पहले भिवाड़ी में दर्ज किया था ये क़िस्सा । आज फ़ेसबुक ने याद दिलाया तो मुझे लगा इसे ब्लॉग पर दर्ज कर दिया जाए । आख़िर इस अटकने की आदत में तो इज़ाफ़ा ही हुआ है इधर साल दर साल ।

उठकर एक तो प्याला पीया काफी का  जो ये रहा और इस ब्लॉग पोस्ट को दर्ज कर दिया :



Good morning 

सुप्रभात 

गुलमोहर , शिवाड़ एरिया , बापू नगर , जयपुर ।

शनिवार ८ अप्रेल २०१७ .

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Wednesday, 5 April 2017

लट्टू हो गया : वाह क्या बात है ।😃


#sumantpandya 

लट्टू हो गया :😊 वाह क्या बात ! #sumantpandya

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“ सुमन्त काका ! वो उस दिन आपने मंजु काकी की फोटो भोत बढ़िया लगाईं , मजा आ गया देखकर ….।”

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अब मैं पूछता हूं :

   “ और जो उस फोटो बाबत मैंने लिखा वो भी देखा के नहीं ? “

जवाब :

“ वो हमने नहीं पढ़ा ...।”

चलो कोई बात नहीं इतना औसाण नहीं मिलता कि इबारत भी देखें , फोटो देख लेते हैं और सराहना करते हैं . 

धन्य मेरे भतीजे भतीजियों , शाबाश इस चाहत के लिए .

थोड़ा खतरा मोल लेते हुए कुछ तस्वीरें और और प्रकाशित किए देता हूं जिससे ये लोग देख सकें कि काका किस पे लट्टू हुआ था . 

अब ये तो बहरहाल सुनना पड़ेगा ही के फोटो क्यों लगा दी पर वो ही जवाब ,” आदत से मजबूर .”

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सुप्रभात 

टीका आमंत्रित :Manju Pandya.

सुमन्त पंड्या 

@ गुलमोहर , शिवाड़ एरिया , बापू नगर , जयपुर .

   बुधवार 6 अप्रेल 2016 .

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#स्मृतियोंकेचलचित्र #जयपुरडायरी 


आज का अपडेट :

Good morning & private coffee done @ Gulmohar . ☕

जय भोले नाथ ।🔔🔔

मिलेंगे नेहरू गार्डन में .

शिव मंदिर के चबूतरे पर ।


गुरूवार ६अप्रेल २०१७ .


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जयपुर ड़ायरी 

बनस्थली डायरी : प्रोफ़ेसर नवल किशोर आए : स्मृतियोंकेचलचित्र 


प्रोफेसर नवल किशोर : जब बनस्थली आए . 

**************** **************** #sumantpandya 😊😊😊

#बनस्थलीडायरी


एक दिन अनायास रोडवेज की बस से उतरकर प्रख्यात हिंदी आलोचक प्रोफ़ेसर नवल किशोर 44 रवीन्द्र निवास में हम लोगों के घर आ गए , अगले दिन बनस्थली के हिंदी विभाग में कोई आयोजन था उन्हें उसी में शामिल होना था . शायद बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक थी . आते ही बोले :

" मैं तो भाया जी के पास आया हूं , कल तक अपन बैठकर बातें करेंगे , मैं आ गया हूं ये बात हिंदी वालों को जाकर मत बताना . "


मुझे वे भाया जी कहकर ही बुलाते हैं , राजस्थानी का यह सम्बोधन मुझे भी प्रिय है . जब उन्होंने खबरदार ही कर दिया था तो मैं भला क्यों हिंदी वालों को जाकर बताता . अगले दिन बैठक का समय होने तक वे हमारे ही गोपन अतिथि रहे . इस अवधि में बतरस की गंगा लगातार प्रवाहित रही .


अगला दिन आया , वे जिस निमित्त से आए थे उसके लिए जाने लगे तो जीवन संगिनी ने कहा :


" भाई साब , दोपहर का भोजन भी आप यहीं करेंगे यह तय रहा ."


वे इसमे कुछ असमर्थता इस लिए भी बताने लगे कि चड़ीगढ़ के प्रोफ़ेसर यश गुलाटी भी आने वाले हैं तो वे उनका साथ देंगे और इसलिए संस्था की मेहमान नवाजी मे ही भोजन करेंगे . इस का भी समाधान ये निकाला गया कि वे भी दोपहर के भोजन में यहीं शामिल कर लिए जाएंगे . दोनों प्रोफेसरान को इधर लेकर आने की जिम्मेदारी पन्ना जी को दे दी गई और इस प्रकार हमारी एक और लंचन मीटिंग तय हो गई .


दोपहर भोजन पर प्रोफ़ेसर गुलाटी से नवल जी ने हम लोगों का परिचय कराया . वे मिल कर बहुत खुश हुए पर उन्होंने अपने को ख़ास तौर से भोजन पर बुलाए जाने का सबब पूछा और मैं अनायास कह बैठा :


" क्या बताऊं प्रोफ़ेसर साब , होने को तो अब मैं हिंदी वालों का बाप भी हूं , पर हिंदी वालों का एक पुराना कर्ज मुझपर बकाया है जिसे थोड़ा बहुत चुकाने का प्रयास करता हूं. "


भले प्रोफ़ेसर गुलाटी इसका निहितार्थ समझ अलवर के नंदकिशोर जी *और तत्कालीन प्रिंसिपल सांवल राम जी से अपने परिचय की बातें करने लगे . आखिर एक हिंदी वाले ने अपनी बेटी का विवाह मुझसे किया था . शायद इसी का असर है कि बेटे भी उसी विषय के मार्ग पर गए , अपने विषय में तो मैं सिर्फ बेटी को ही डाल पाया .

बनस्थली के दिनों और प्रोफ़ेसर नवल किशोर को बहुत याद करते हुए .

प्रति सेवा में प्रस्तुत : professNawalkishore Sharma

* हिमांशु के नाना .


समयाभाव के कारण आज की चर्चा यही. स्थगित करता हूं .

सह अभिवादनManju Pandyadya .


सुप्रभात . Good morning.


सुमन्त

आशियाना आँगन . भिवाड़ी .

6 अप्रेल 2015 .

फोटो का श्रेय : पल्लव Pallav Banaas Jan

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👌👌👌👌👌

 ये पोस्ट गए बरस भिवाड़ी में बैठे लिखी थी , आज फेसबुक ने ये बात याद दिलाई .

इस पोस्ट को तो कुछ रत्न जड़कर मैं नए सिरे से अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करूंगा .

जयपुर 6 अप्रेल 2016 .


#स्मृतियोंकेचलचित्र #जयपुरडायरी #बनस्थलीडायरी


आज का अपडेट :

Good morning & private coffee done @ Gulmohar . ☕

जय भोले नाथ ।🔔🔔

मिलेंगे नेहरू गार्डन में .

शिव मंदिर के चबूतरे पर ।


गुरूवार ६अप्रेल २०१७ .

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Tuesday, 4 April 2017

ब्लॉग पर दर्ज : बनस्थली डायरी - स्मृतियों के चलचित्र ।❤️❤️

Good morning . Private coffee done @ 😊 Gulmohar , jaipur . 

(1)

  पहली फोटो का इतिहास - जिन दिनों जय और छुटकू फोटोग्राफी का अभ्यास किया करते रहे थे तब " पापा इस्माइल " कहे के जवाब में ये थी मेरी फरमाइशी मुस्कराहट .

(2)

   दूसरी एक यादगार फोटो है बनस्थली के 44 रवीन्द्र निवास के बाहर के गुड़हल के साथ हम दोनों की .

इसे कहते हैं : गुनाह बेलज्जत ! ये तो मुझे ज्यादा तस्वीरें साझा करने को मने करती हैं .और मुझे जाने क्या हो गया है मेरा मन करता है अलग अलग काल खंड की तस्वीरें साझा करने को .

सुप्रभात .

सुमन्त पंड्या .

@ गुलमोहर , शिवाड़ एरिया , बापू नगर , जयपुर .

5 अप्रेल 2016 .*******


चलता हूं , लौटके मिलता हूं , बाय !

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आज का अपडेट :

गए बरस की पोस्ट है  । जस की तस ब्लॉग पर टीप दी है ।

सनद रहे वक़्त ज़रूरत काम आए ।

जयपुर 

बुधवार ५ अप्रेल २०१७ ।



पहली दूसरी फ़ोटो का क्रम उलट पलट हो गया है पर बात तो स्पष्ट है और क्या फरक पड़ता है वैसे भी ।

नमस्कार 🙏

५ अप्रेल २०१७ .

Monday, 3 April 2017

बनस्थली डायरी : गोपाल नायक के बारे में ✅

#स्मृतियोंकेचलचित्र


बनस्थली की बातें क्रम में : गोपाल नायक के बारे में . एक .


उन्नीस सौ चौरासी का साल .

समय : गर्मी की छुट्टियां .

स्थान : बनस्थली विद्यापीठ .

यह कुछ ऐसा दौर था जब घोषित रूप से बनस्थली विश्वविद्यालय तो बन चुका था और रूपांतरण का दौर चल रहा था . पहली जरूरत के तौर पर नए पाठ्यक्रम बनाए जा रहे थे . बाहर से आए नामचीन लोग इसमें मददगार बने थे . स्थानापन्न गेस्ट हाउस के तौर पर ये लोग पर एक छात्रावास में ठहरे हुए थे और इधर ज्ञान मंदिर में पाठ्यक्रम समिति की बैठकें चल रही थीं .

उस दिन दोपहर को बातें करते करते पांच प्रोफेसरान मेरे साथ 44 रवीन्द्र निवास आ गए , इनमे विविध विषयों के लोग थे . जून का महीना , सब कोई गर्मी से बेहाल . कमरे का पंखा खोल दिया पर राहत न मिली, मैं उनके स्वागत के निमित्त रसोई और कमरे के बीच आ जा रहा था . इस बीच बिजली भी आ जा रही थी .एक फ्रोफेसर बोले :


" सुमन्त , बुरा न मानो तो मैं अपना कमीज उतार दूं , गर्मी बहुत है ."


मैं ने तुरंत उन्हें हैंगर दे दिया और कहा :

" अपन ही अपन हैं , इसमे बुरा मानने की क्या बात है ?"


हुआ ये कि थोड़ी देर में सबके कमीज हैंगरों पर टके हुए थे , सिवाय एक के जिन्होंने पसीने से भीगा कमीज धो ही डाला था और चौक में सुखा दिया था . उस दिन शाम की बैठक में वो प्रोफ़ेसर मेरा ही कमीज पहन कर गए , मुझे उनका ये अंदाज बड़ा बढ़िया लगा .


इस परिघटना के बाद मैं अपने दफ्तर के सर्वेसर्वा अधिकारी भंवर लाल जी , जो अब असिस्टेंट रजिस्ट्रार या शायद डिप्टी रजिस्ट्रार बन गए थे , के पास गया और पूरी आप बीती सुनाई . साथ ही एक मांग भी रखी कि मेरे घर 44 रवीन्द्र निवास के बाहर आवश्यक रूप से एक नीम का पेड़ होना चाहिए जिसकी छांव में खाट डाली जा सके और बैठा जा सके . भंवर लाल जी ने मुझे इस विषय में आश्वस्त किया लेकिन साथ ही कहा :


" आपकी तो नायक से दोस्ती है , इस में मैं क्यों बीच में पड़ूं , आप सीधे नायक से कहो , वो लगा देगा आपके यहां नीम का पेड़ ."


 और इस प्रकार मेरी नीम के पेड़ की स्वैर कल्पना प्रारम्भ हुई जिसे साकार किया मेरे अभिन्न मित्र गोपाल नायक ने .


अभी तीन दिन पहले जब उड़ीसा दिवस की बात आई तो मुझे गोपाल नायक बहुत याद आए और साथ ही याद आए वो एक नहीं दो नीम , जो आज भी उस परिसर में 44 रवीन्द्र निवास के बाहर लगे हुए हैं . 

गोपाल नायक उन दिनों वहां गार्डन सुपरिंटेंडेंट हुआ करते थे और मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे .एक एक करके दो नीम मैं उन्हीं से मांग कर लाया था और घर के बाहर लगाए थे , जो आज भी उस परिसर में हैं .


बनस्थली की मधुर स्मृतियों के साथ .


समर्थन : Manju Pandya


#बनस्थली


#गोपालनायक


सुप्रभात . Good morning .


सुमन्त 

आशियाना आँगन , भिवाड़ी .

शनिवार 4 अप्रेल 2015 .

ब्लॉग पर दर्ज :   मंगलवार ४ अप्रेल २०१७ 

#स्मृतियोंकेचलचित्र #बनस्थलीडायरी #गोपालनायक 


आज का अपडेट :

आज ये किस्सा अपने ब्लॉग पर दर्ज करूंगा ।

अभी हाल की गतिविधि :

Good morning & private coffee done @ Gulmohar ☕

जय भोले नाथ ।🔔🔔

राम नवमी 

४ अप्रेल २०१७ .