Sunday, 5 November 2017

लम्बरदार स्कूल की याद -- भाग दो -- उदयपुर डायरी .

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#लम्बरदार_स्कूल_की_याद : भाग दो .


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कल मैंने अपने स्कूल की यादों का सिलसिला शुरु किया था , आज इसे आगे बढ़ाता हूं .

दाखिले की पृष्ठभूमि :


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काकाजी * का ट्रान्सफर  उदयपुर का हो गया था , वो उदयपुर के ट्रेजरी ऑफिसर बनाए गए थे . जीजी जीजाजी और उनके दो बच्चे पहले से ही उदयपुर में थे . बीते सत्र में हम तीन भाई अम्मा के साथ जयपुर में रहकर पढ़ रहे थे , बदले हालात में पूरे परिवार के उदयपुर में जा बसने का निर्णय लिया गया . इसी क्रम में मेरी पांती में उदयपुर का लम्बरदार हायर सैकेण्डरी स्कूल आया दाखिले के लिए , आखिर पढ़ाई तो आगे जारी रहनी ही थी . छोटा भाई पड़ोस के मिडिल स्कूल में भर्ती करवाया गया और बड़े भाई कालेज में .


काकाजी दफ्तर में व्यस्त थे और इसलिए जीजाजी मुझे स्कूल में भर्ती करवाने गए थे . उस समय जीजाजी एम बी कॉलेज में प्राध्यापक थे और जीजी मीरां गर्ल्स कॉलेज में .

लम्बरदार स्कूल की बात :


---------------------------  यह स्कूल हाई स्कूल से हायर सैकेंडरी स्कूल बनाया जा रहा था . नए कोर्स के हिसाब से तीन वर्ष के हायर सैकेंडरी कोर्स की दसवीं कक्षा के लिए मेरा प्रवेश आवेदन पत्र था जो हैड माट साब के विचाराधीन था .

दो प्रकार की दसवीं क्लास .


----------------------------- दसवीं क्लास के भी कई सैक्शन थे उनमें वो भी थे जो पिछली मैट्रिक परीक्षा में फेल विद्यार्थी थे और पुराने पाठ्यक्रम से ही फिर पढ़ाई कर रहे थे . इनमें कुछ एक बहुत अच्छे खिलाड़ी भी थे और वो भी स्कूल के लिए कीमती थे . उनका डील डोल ही हैड माट साब के ध्यान में था और इसलिए वो मुझे एक कमजोर लड़का मान रहे थे .

कैसे माने हैड माट साब ..


~~~~~~~~~~~~~~  जब हैड माट साब ने मुझे फिर से नवें दर्जे में भर्ती करवाने की बात की तो जीजाजी ने एडमिशन फॉर्म के साथ नत्थी नवें दर्जे की मार्कलिस्ट को उनके सामने रखा जिसमे प्रथम श्रेणी , कक्षा में पहला स्थान और अधिकांश विषयों में विशेष योग्यता का उल्लेख था .


आखिर हैड माट साब मान गए और मेरा दाखिला हो गया . मैं अपनी पढ़ाई में लग गया . मेरी ज्यादा  कोई जान पहचान नहीं थी मैं स्कूल में नया नया था , लेकिन तभी एक अवसर आया , ऐसा आया कि लोग मुझे जानने लगे . क्या था  वो अवसर वही  बताने जा रहा हूं . ये केवल तब की बात नहीं है ये तो अब की भी बात है कि कोई कारण बन जाता है ऐसा कि अनायास बहुत से लोगों से जान पहचान हो जाती है .

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी .


-------------------- ये ही कोई अगस्त का महीना रहा होगा . भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को  लम्बरदार स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाने वाला था और मैं भी उसमें भाग लेने के लिए घर से  निकला था और यह विचार करता जा रहा था कि इस उत्सव में मेरी भागीदारी क्या हो .


हम लोग तब भूपालपुरा में बाबूजी बोहत लाल धाकड़ के मकान में किराए पर रहा करते थे , वहां से चेटक सर्किल के पास स्कूल पहुंचने के लिए मीरां  गर्ल्स कालेज याने रेजीडेन्सी के अहाते से होकर भी सीधा रास्ता जाता था ,मेरा  मन किया और मैं उसी रास्ते से गया . इसी परिसर के अहाते में स्टाफ क्वार्टर भी थे जिनमें जीजी जीजाजी रहा करते थे  . स्कूल जाते हुए मैं उनके पास पहुंचा और ये इच्छा प्रगट की कि मैं स्कूल के इस आयोजन में एक भाषण देवूं .


सुबब सुबह का समय था , जीजी जीजाजी दोनों ही मुझे भाषण के लिए  बिंदु बताने लगे और विभिन्न सुझाव देने लगे . श्री कृष्ण की बाल लीला, उनका सखा रूप , उनकी रास लीला और अलौकिक प्रेम , उनका दार्शनिक रूप , उनका राजनीतिज्ञ रूप इन सब के उदाहरण भी बताए और इस प्रकार भाषण की रूपरेखा सुझा दी दोनों ने मिलकर .


पूरा भाषण लिखने बांचने का तो समय नहीं था लेकिन बातें मुझे कहने लायक समझ में आ गई थीं . मैं स्कूल चला गया और उत्सव में भाषण देने के लिए अपना नाम दर्ज करवा दिया .

उत्सव का परिदृश्य :


~~~~~~~~~~~~ लम्बरदार स्कूल परिसर में एक बड़ा बगीचा था जिसमें एक पक्की स्टेज बनी हुई थी .आयोजक  और विशिष्ट व्यक्ति स्टेज पर बैठे थे और सारा विद्यार्थी समुदाय बाग़ में बिछायात पर , इसी समुदाय का मैं भी एक हिस्सा था . संगीत के लिए साज और माइक का भी इंतजाम था , मुख्य रूप से भजन गए जा रहे थे .


  मैं भी इस आयोजन के दौरान स्टेज पर बुलाए जाने का इंतज़ार कर रहा था . आखिर मेरा भी नाम पुकारा गया और मैं माइक के पास पहुंचा . पैरों में थोड़ी कंपकंपी थी पर मैंने उसपर जल्द काबू पा लिया और जो विचार मेरे ध्यान में  थोड़ी देर पहले कायम हुए थे उनके आधार पर  अवसर के अनुकूल भाषण दे डाला . अपनी भूमिका पूरी हुई जानकार स्टेज से उतरने के लिए सीढ़ियों की ओर बढ़ने लगा . वहां  मंचस्थ व्यक्तियों में बीचों बीच हैड माट साब बैठे हुए थे , उन्होंने मुझे रोका और मेरी पीठ पर हाथ रख दिया .


मैंने अपने जीवन में उस दिन पहला एक्सटेम्पोर भाषण दिया था .


ऊपर भूमिका पूरी होने की बात आई है , मुझे उस दिन सुबह पता नहीं था कि वास्तव में भूमिका तो उस दिन नए सिरे से प्रारम्भ हो रही थी .


बचपन की इन मीठी यादों को सहेजते हुए .


~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~  * काकाजी ~ हमारे पिता जी .


सुप्रभात .


प्रातःकालीन सभा स्थगित ….


विशेष उल्लेख : Manju Pandya


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सुमन्त पंड्या.


@ आशियाना आंगन , भिवाड़ी.


6 नवम्बर 2015.


#स्मृतियोंकेचलचित्र    #उदयपुडायरी  #sumantPandya

संस्मरण  की। ये दूसरी कड़ी आज ब्लॉग पर प्रकाशित -

जयपुर 

  सोमवार   ६  नवम्बर  २०१७ .

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Saturday, 4 November 2017

लंबरदार स्कूल की याद  — भाग एक —उदयपुर डायरी .

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     #लम्बरदार_स्कूल_की_याद : भाग एक .#स्मृतियोंकेचलचित्र #उदयपुरडायरी #sumantpandya

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बचपन में कक्षा दस और थोड़े समय कक्षा ग्यारह में मैं उदयपुर के ऐतिहासिक लम्बरदार हायर सैकेण्डरी स्कूल में पढने गया , जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो उस दौर की एक एक बात याद आती है . किस तरह वहां मेरा दाखिला हुआ और कैसे वो स्कूल मुझे अगले सत्र के बीच में छोड़ना पड़ा उस बारे में एक एक बात याद आती है और कुछ बातें याद करके तो मुझे आज दिन तक आश्चर्य होता है . उस दौर के सहपाठी दोस्तों को मैं आज दिन तक याद करता हूं . उस दौर के साथियों में से एक स्कूल की पढ़ाई के कोई एक दशक बाद फिर मिले थे जो अब भी मेरे संपर्क में हैं , वो खुद ही मेरी समझ से बोल पड़ेंगे जब ये यादगार सिलसिला आगे बढ़ेगा .

उस दौर के मेरे अध्यापकों और प्रधानाध्यापकों को आज दिन तक याद करता हूं , कुछ एक से बाद में मिलना भी हुआ . कैसे अलग थे वो लोग , किस मिट्टी के बने थे वो लोग , आज स्कूल शिक्षा और ख़ास तौर से सरकारी स्कूलों के हाल बेहाल देखकर मुझे बरबस वे दिन और वे लोग याद आ जाते हैं .


और भी संस्मरण हैं बताने लायक : पर अभी नहीं .

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किस तरह मैं राजनीतिशास्त्र विभाग में पढ़ने गया वो भी कोई कम रोचक कहानी नहीं है पर वो अगले दौर में आ ही जाएगी , अभी तो लम्बरदार स्कूल की ही बात करते हैं , उस दौर की स्कूल शिक्षा की ही बात करते हैं .


वर्ष उन्नीस सौ बासठ की बात ~

--------------------------------- कुछ दिनों पहले मैंने अपनी वो तस्वीर अपनी फेसबुक दीवार पर इस आशय से टांकी थी कि स्कूल के जमाने के मेमोयर्स लिखूंगा, वो तस्वीर जो पहली बार बोर्ड परीक्षा के फार्म में चिपकाई गई थी . पर शायद वो फजूल की लगाईं उसमें तो मैंने कोट पहना हुआ है और उस बात की कोई विशेष पुष्टि नहीं होती जो मैं बताने जा रहा हूं . जब वो बात खुलेगी तो आप भी बोलोगे ,” ऐसा भी होता है !”

उदयपुर के लम्बरदार स्कूल में दाखिले की नौबत क्यों आई ये भी बताना पड़ेगा पर अभी हाल सीधे हैड मास्टर साब के कमरे की घटना पर आ जाते हैं . बात सत्रारम्भ जुलाई उन्नीस सौ बासठ की है ~~~~


प्रवेश आवेदन ~

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तत्कालीन लम्बरदार हायर सैकेंडरी स्कूल के बड़े से प्रवेश द्वार में घुसते ही दायें हाथ को ऊंचे से लंबे चबूतरे पर पहला ही कमरा हैड मास्टर साब का था , श्री गोपाल लाल शर्मा हैड मास्टर थे , जीजाजी मुझे स्कूल में दाखिल करवाने गए थे . कक्षा नौ की अंकतालिका और कक्षा दस में दाखिले का फ़ार्म हैड मास्टर साब की टेबिल पर था . मैं हैड मास्टर साब की टेबिल के नजदीक एक स्टूल पर बैठा , एकदम जैसे डाक्टर को दिखाने के लिए मरीज बैठता है . उन्होंने फ़ार्म देखा और मुझपर नजर डाली और एक बार को जो निर्णय सुना दिया उससे तो मेरा उत्साह ही ठंडा पड़ गया . हैड माट साब बोले :


“ इसे मैं नवें दर्जे में ही दाखिला दे पाऊंगा , इतना कमजोर बच्चा दसवें दर्जे की पढ़ाई कैसे कर पाएगा …. .? “


असल में दसवें की पढ़ाई के लिए लडके को जैसा हृष्टपुष्ट होना चाहिए था उस मानक से मैं तो बहुत दूर था .

बात थोड़ी लंबी चली हैड माट साब और जीजाजी के बीच और कैसे पसीजे हैड माट साब ये भी बताऊंगा , असल में उस समय उस स्कूल में दसवां दर्जा भी तो दो तरह का होता था तो डील डौल में तो दसवें दर्जे लायक लड़कों में मैं कहां ठहरता इसलिए हैड माट साब जो बोले वो समझ में आता है .


वे दिन और वे लोग बहुत याद आते हैं . उन दिनों को याद करते हुए..

प्रातःकालीन सभा स्थगित…

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  सुमन्त पंड्या   

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  आप की सुविधा के लिए साझा करने का प्रयास जीवन संगिनी 

 Manju Pandya #मंजु


   @ आशियाना आंगन, भिवाड़ी .

    5 नवम्बर 2015 .

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आज ब्लॉग पर प्रकाशित —

जयपुर 

रविवार ५ नवम्बर  २०१७ .

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Friday, 3 November 2017

शपथ पत्र -- फेसबुक डायरी

शपथ पत्र .

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  #शपथ_पत्र

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“ न दैन्यम् न पलायनम् .”

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वैसे तो सार की बात ये है कि झुकूंगा नहीं और रुकूंगा नहीं .

पर फिर भी इस भोर में उठकर यह शपथ पत्र इस  आशय से तैयार कर रहा हूं कि सनद रहे और वक्त जरूरत काम आए .

1

   एतद् द्वारा मैं ये घोषणा करता हूं कि मैंने फेसबुक समुदाय के समस्त मर्यादा नियमों का  गए दो दिनों में व्यापक अध्ययन कर लिया है और तदनुरून उनका शब्द रूप और भाव रूप ( लैटर एंड स्पिरिट , क्योंकि फेसबुक इन्हीं शब्दों को समझता है ) में अक्षरशः पालन करूंगा .

2

   मेरी ओर से यदा कदा जो किसी को टैग कर देने की आदत है उसमें धीरेधीरे सुधार करूंगा , जीवन संगिनी को नियमित रूप से टैग कर देने की आदत को भी बदलने का ही प्रयास करूंगा . नया ज़माना अब इन भावनाओं को नहीं समझता तो मैं भी इससे ऊपर उठने का प्रयास करूंगा .

3

भूल चाहे किसी की भी रही हो , मैं तो यही मानूंगा कि  कोई न कोई गफलत मुझसे ही हुई जिसके कारण फेसबुक को मुझ पर रोक लगानी पड़ी , आड़ लगानी पड़ी .

4

लोग तो चालीस चालीस लोगों को टैग कर डालते हैं .

मुझे निवेदन करना पड़ता है कि मुझे शामिल न करें , लोग समझ भी जाते हैं मान भी जाते है , उनका तरीका उनको मुबारक , मुझे इससे क्या .

सार की बात~

मैं किसी का अनुसरण / अनुकरण नहीं करूंगा .

5

  मैं कोई झूंठी अफवाह नहीं फैलाउंगा , जो कुछ कहूंगा सच कहूंगा और सच के सिवाय कुछ नहीं कहूंगा .

6

फेसबुक एक अच्छा मंच है , चाहे इसके संचालन में कैसी भी निरंकुशता हो मैं उसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा और इसकी शर्तों पर इस मंच पर बना रहूंगा .” ऑफ्टर ऑल रूल्स आर रूल्स.”

7

नए जमाने को सलाम करूंगा और अपनी बात किसी पर नहीं थोपूंगा .

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सुप्रभात.

प्रातःकालीन सभा स्थगित……

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सुमन्त पंड्या

@ आशियाना आंगन, भिवाड़ी

4 नवम्बर 2015 .

मूल शपथ पत्र आज ब्लॉग पर। प्रकाशित —

जयपुर 

शनिवार  ४ नवम्बर  २०१७ .



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अड़ंगेबाजी बंद होवे : फेसबुक रम्बाद

अड़ंगेबाजी  बंद होवे

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चौबीस घंटे से कुछ अधिक फेसबुक अड़ंगा लगाता ऱहा , मेरी पोस्ट अटकाता रहा, कोई कोई पोस्ट जीमता रहा मैं धैर्य  पूर्वक देखता रहा कि जिसने जाजम बिछाई है वो यहां सभा करने से मने करता है तो अपने क्या है , रहने देते हैं . पर इसमें भी एक बात अच्छी हुई , मेरे मिलने वाले बहुतेरे आ गए ये कहने को कि मेरी किसी पोस्ट में कभी कुछ आपत्तिजनक नहीं रहा .

कल रात फिर एक काम हाथ में ले बैठा कि सत्ताईस तारीख को जिन लोगों ने मुझे बधाई सन्देश भेजे थे उन को एक एक कर आभार कहने लगा . थोड़ी देर बाद फेसबुक की तरफ से वैसी ही आड़ फिर खड़ी की जाने लगी , ज्यादा तो समय ही नहीं  मिला था , मैंने वो एजेंडा वहीँ स्थगित कर दिया . अब आज भोर में ये परीक्षण पोस्ट है जो जारी करने का प्रयास करूंगा .

सब का आभार ~

~~~~~~~~~~    इससे पहले कि अब कोई पाबंदी लगे इतना तो यहीं कह देवूं कि आप सब ने जो बधाई सन्देश भेजे उनके लिए मैं आपका आभारी हूं , चाहे मैं व्यक्तिगत रूप से आप तक पहुंच पावूं या नहीं .

अड़ंगे बाजी आप देख ही रहे हैं .

आगे क्या ?

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  अगर ये परीक्षण पोस्ट लांच हो गई तो मैं मान लूंगा कि ट्राफिक खुला है कोई यादगार पोस्ट लिखूंगा और आगे जारी करूंगा .

ये तो वैसे ही है जैसे सभा शुरु होने से पहले माइक वाले “ हैलो टैस्टिंग...हैलो टैस्टिंग “ किया करते हैं .

~~~~~~~~ प्रातःकालीन सभा स्थगित … इस घोषणा के साथ कि अड़ंगे बाजी बंद होवे .

सुप्रभात .

साझा : संभव नहीं हुआ #मंजुपंड्या

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सुमन्त पंड्या

@ आशियाना आँगन , भिवाड़ी

    3 नवम्बर 2015 .

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#स्मृतियोंकेचलचित्र

#भिवाड़ीडायरी

#sumantpandya

पूरक ३ नवम्बर २०१६ .

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आज ब्लॉग पर  दर्ज 

जयपुर   ३नवम्बर २०१७ .



Thursday, 2 November 2017

फिर वो ही अड़ंगेबाजी .

#फिर_वो_ही_अड़ंगेबाजी

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एक टिप्पणी लिखने बैठा और फिर वही अड़ंगेबाजी .

इशारा है किसी को टैग मत करो .

सच मन खट्टा हो गया इस अड़ंगेबाजी से .

अभिव्यक्ति का कोई अन्य मंच देखूं .

जैसा देश का माहोल है वैसा ही हाल फेसबुक का है . रात तक एक शपथ -पत्र जारी करता हूं जैसा भगवान् अटलानी की कहानी में आया था .

मेरी कहन पर इतना पहरा क्यों ?

शुभ अपराह्न .

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सुमन्त पंड्या

@आशियाना आँगन , भिवाड़ी

     3 नवम्बर 2015

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#स्मृतियोंकेचलचित्र

#भिवाड़ीडायरी

#sumantpandya 


दो बरस पहले हुई थी ये अड़ंगेबाज़ी , आज ये क़िस्सा ब्लॉग पर दर्ज . इस बाबत और सामग्री भी आगे ब्लॉग पर जोडूंग़ा और इसके अलावा जोडूंग़ा एक शपथ पत्र .

जयपुर 

शुक्रवार ३ सितम्बर २०१७ .

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Wednesday, 1 November 2017

कुण कै  लागी लाय  ? - फ़ेसबुक डायरी 

कुण बोया कुण काटिया , कुण कै लागी लाय ………

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#कुण_बोया_कुण_काटिया


परसों शाम से ये नाटक मेरे फेसबुक खाते पर शुरु हुआ है , देखते हैं उसका समाहार हो गया है या के अब हुआ जाता है . इस बारे में जो कुछ मुझे कहना है वो ही अब कहे देता हूं .


1 

जैसा ब्लाकेड हुआ वो सीमित ही था / है , मेरे चीजें पोस्ट करने पर कोई पाबंदी नहीं रही . हां ये जरूर हुआ कि कोई तस्वीर मैं पोस्ट न कर पावूं और न ही किसी को टैग कर पावूं . वैसे ही मैं तस्वीरें पोस्ट करने का बहुत आदी नहीं हूं , किसी ख़ास बात की पुष्टि में ही तस्वीर साझा करता हूं . मेरे पास दिखाने को ऐसी तस्वीरें हैं ही कौनसी . जीवन संगिनी #मंजु_पंड्या जिन्हें मैं अपना निजी सेंसर बोर्ड कहता हूं मुझे टोकती ही हैं कि मैं तस्वीरों से न टरकाउं और जो कहना है शब्दों में कहूं .

हां , कठिनाई तब आई जब किसी को टैग करने पर भी पाबंदी लग गई .

अब ये फेसबुक वाले , अकल से पैदल , समझते तो हैं नहीं अगर सेंसर बोर्ड को टैग नहीं किया तो मेरी लेखनी उल्टे बेलाग नहीं हो जाएगी . खैर जो हुआ सो हुआ ……… आगे देखते हैं क्या होता है .

2.

इस ब्लॉकेड के बाद आप सब कोई ने मुझे जो सहारा दिया और हिम्मत बंधाई उसके लिए आभार कहना बहुत छोटा भुगतान माना जाएगा . मैं आभार न कहकर अनंत आशीर्वाद कहूंगा मेरी लड़कियों को और सादर प्रणाम साथियों को . फेसबुक मुझे जिन सामुदायिक मर्यादा नियमों को देख लेने की बात कह रहा है वो और उसके भारत में बैठे नुमाइन्दे देखें इस मित्र समुदाय और उसकी भावनओं को .

3

अपनी टूटी फूटी अंग्रेजी में मैंने तीन सवाल दागे थे फेसबुक संचालकों की ओर जो मोटे तौर पर इस प्रकार थे ~

         1 मेरे लेखन में अभद्र और गाली गलोच वाली या आहत करने वाली~~~ क्या बात पाई गई ?

         2 मेरी शिकायत किसने की ? जिसको ही थोड़ी चुभती हुई बात 

             बनाया है कि किसके लाय लगी ? फेसबुक पर मेरे तो दोस्त हैं,  

              दुश्मन तो कोई नहीं .

         3 कि ये पाबंदी कब हटेगी ?


  फेसबुक से तो कोई जवाब नहीं आया पर आप सब ने इसका स्पष्टीकरण दे ही दिया है . इसके लिए सभी फेसबुक मित्रों को साधुवाद .

   

बातें तो बहुत है कहने की पर उपलब्ध समयावधि समाप्त हो रही है .

सुप्रभात .

प्रातःकालीन सभा स्थगित…..

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सुमन्त पंड्या .

साझा : Manju Pandya

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@ आशियाना आंगन , भिवाड़ी .

2 नवम्बर 2015 .

~~~~~~~ अथ श्री ब्लॉकेडाय नमः ……...

त्वरित प्रतिक्रिया मिली सत्यानंद निरुपम की 

साभार उद्धृत  —

“  ॐ शांति: शांति: शांति: 

सर्वे लिखन्तु बेखटके सर्वे टैगन्तु खुल्लमखुल्ला: 

सर्वे पढ़न्तु बेप्रॉब्लमे सर्वे एन्जॉय अघा-अघाय: 

अंकल जी, मैंने प्रार्थना की है अभी। अब वो क्या है कि समझदार को तो ईश्वर भी समझा लेते हैं। मूर्ख को सिर्फ परिस्थितियां समझा पाती हैं। अगर फेसबुक समझ जाए तो मान लिया जाएगा कि वह समझदार है। वरना क्या है कि अब रहना तो इन मूर्खों के राज में ही है ;) सो एक भजन सुनिए- रहना नहीं देस बिराना है... अंकल जी, मिलते हैं ब्रेक के बाद। जरा दफ्तरी अलार्म बज गया है :)  “

प्रियंकर पालीवाल ने लिखा  

साभार उद्धृत —

“  ज़ुरूर कुछ तकनीकी चक्कर होगा . वरना आप जैसे अजातशत्रु को ब्लॉक करने और करवाने वाला कौन पैदा हो गया . “

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आज ये क़िस्सा ब्लॉग पर प्रकाशित किए देता हूं  , ये एक बानगी है दो बरस पहले हुए रम्बाद की .

ये रम्बाद कई दिन तक चला था वो और बातें भी आगे दोहराऊँगा .

जयपुर 

गुरुवार २ नवम्बर २०१७ .

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पांच रैक्टर — जयपुर डायरी 

पुराने जयपुर की बातें * 

 जयपुर राज्य में श्याम सुन्दर शर्मा नाम के , एक ही नाम के , दो व्यक्ति बड़े मशहूर थे एक हमारे बाबा जो कभी नोबल्स स्कूल के प्रिंसिपल थे और फिर पब्लिक सर्विस कमीशन के पहले सेकेट्री बने । दूसरे डाइरेक्टर पब्लिक इंसट्रक्शन्स थे ।

आज दूसरे वाले श्याम सुन्दर जी की बाबत एक बात -


डायरेक्टर साब दफ्तर में बैठे थे । दरबान आगंतुकों को रोक रहा था -- साब से मिलने का समय नहीं है ।


एक आगंतुक दरबान को परे हटाते हुए बोला :


“ खै दे थारा ( ढाई रेक्टर )डायरेक्टर नै पांच रेक्टर आयो छै ।*


* आज उनके बाप मिलने आ गये थे ।

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