राजस्थानी बोध कथा : मोड़ो चेत्यो !
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ #sumantpandya
एक भोला ग्रामीण किसी महात्मा के सत्संग के बाद उनके संपर्क में आया और अपने मन में जो बात थी , जो चाह थी वो उनसे कह बैठा . वो सहज भाव से बोला :
“ म्हाराज मनै कोई मंतर दे द्यो , जीं को मैं भी जाप करूं अर ठाकुर जी नैं ध्याऊं मनाऊं .”
( “ महाराज मुझे कोई मन्त्र प्रदान कर दीजिए जिससे मैं भी प्रभु का ध्यान उपासना कर पावूं .”)
महाराज ने उसकी सुनी और बोले :
“ मोड़ो चेत्यो ! “
अर्थात
देर से जागा .
महाराज जो बोले वो तो स्पष्ट ही है पर वो भोला ग्रामीण ये समझा कि महात्मा की कृपा हो गई और उसे मन्त्र मिल गया है .
मन्त्र में बड़ी शक्ति होती है , अगर ये कहने की आवश्यकता हो तो मैं इस बात के समर्थन में सर जॉन वुड्रफ को खड़ा करूंगा . खैर जाने दीजिए अभी आगे चलें .
आगे क्या हुआ ?
~~~~~~~~~~ उस भोले भाले ने तो मन्त्र का जाप आरम्भ कर दिया था , उसका मन्त्र था:
“ मोड़ो चेत्यो !”
आगे के घटना क्रम ने सिद्ध किया कि कालान्तर में उसे मन्त्र सिद्ध हो गया .
बसंत ऋतु में महादेव जी और पार्वती जी इस लोक में अच्छे दिन देखने आए , भेस बदल कर , और इस भक्त को देखकर आपस में बात करने लगे .
पार्वती जी बोलीं : “ ये किसका ध्यान कर रहा है ? “
महादेव जी और क्या कहते, कह भी क्या सकते थे , बोले :
“ इससे ही पूछ लेवें देवी . “
पार्वती जी छानै सीक उसके पास जाकर पूछने लगीं :
“ अरै तू कुणको ध्यान करै छै .”
( अरे तू किसका ध्यान कर रहा है ? )
और उस भोले का जवाब था :
“ थारै साथ यो बाबो आयो छै न जींको , और कुणको ? “
( अर्थात तेरे साथ ये जो बाबा आया है न उसका और किसका ? )
मेरे ख़याल से अब मेरी ओर से किसी अतिरिक्त टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है .
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सुप्रभात .
सुमन्त पंड्या .
सह अभिवादन : Manju Pandya
गुलमोहर , शिवाड़ एरिया , बापू नगर , जयपुर .
शनिवार 13 फरवरी 2016 .
Kya baat he dadaji..
ReplyDeleteAti uttam..
आभार धर्मेंद्र । ख़ुश रहो ।
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